US Market में Big Tech Stocks में हालिया बिकवाली ने अमेरिकी शेयर बाजार की ताकत को कमजोर कर दिया है। Bloomberg के डेटा के अनुसार, अमेरिका की Market Capitalization अब $59.3 Trillion पर आ गई है, जिससे उसकी Global Equity Market में हिस्सेदारी घटकर 47.8% रह गई है। फरवरी में यह आंकड़ा करीब 51% था, लेकिन लगातार गिरावट के चलते अमेरिका की पकड़ अब पहले जैसी मजबूत नहीं रही।
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चीन, जापान और भारत की स्थिति
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की Equity Market में हिस्सेदारी अभी 9% है, जो अमेरिका के मुकाबले काफी कम है। इसके अलावा, जापान और हॉन्ग कॉन्ग की हिस्सेदारी क्रमशः 5.5% और 4.9% के आसपास बनी हुई है। हालांकि, भारत का शेयर बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है और अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा Equity Market बन चुका है। भारतीय बाजार की Market Capitalization $4.8 Trillion हो गई है, जो Global Market का 3.3% है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका ने बीते एक महीने में जितना नुकसान झेला है, वह पूरे भारत के Equity Market की Total Value से भी ज्यादा है। US Market ने एक महीने में $5.5 Trillion गंवा दिए हैं, जो दिखाता है कि अमेरिकी बाजार में अस्थिरता किस हद तक बढ़ चुकी है।
Tech Stocks के गिरने से आई बड़ी गिरावट
अमेरिका की मौजूदा Market Crisis में सबसे बड़ा हाथ Magnificent Seven Stocks का रहा है। ये वे कंपनियां हैं, जिन्होंने पिछले कुछ सालों में अमेरिकी बाजार को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था, लेकिन अब वही Stocks लगातार गिर रहे हैं।
Tesla की हालत सबसे ज्यादा खराब रही है, जिसके शेयर 50% से ज्यादा टूट चुके हैं। वहीं, Apple, Microsoft, Nvidia, Amazon, Alphabet और Meta के शेयर भी अपने हालिया Highs से 15-20% तक गिर चुके हैं।

इन सात कंपनियों का S&P 500 Index में योगदान बहुत बड़ा है, और यही कारण है कि जब इन Stocks में गिरावट आई, तो पूरा Index 10% तक लुढ़क गया। Market Analysts के मुताबिक, इन गिरावटों का असर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Global Equity Markets में भी इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।
क्या Market ने Risk को सही से समझा?
UBS Securities के Head of Global Markets गौतम चौचरिया का मानना है कि अभी तक Global Markets, खासतौर पर भारत, नए Tariffs के संभावित प्रभाव को पूरी तरह से Price-in नहीं कर पाए हैं। Trade War की बढ़ती संभावनाओं और नए Tariffs के कारण Global Growth पर बुरा असर पड़ सकता है, जिससे आने वाले समय में बाजारों में और भी ज्यादा गिरावट देखने को मिल सकती है।
उनका कहना है कि यदि Tariffs लंबे समय तक लागू रहते हैं, तो यह Global Economy के लिए एक Negative Growth Surprise साबित हो सकता है। इस स्थिति में सिर्फ अमेरिकी बाजार ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े बाजार भी प्रभावित होंगे।
दुनिया के अन्य बाजारों का हाल
अमेरिका की गिरावट के बावजूद कुछ Global Markets ने शानदार प्रदर्शन किया है। जर्मनी (DAX) और फ्रांस (CAC 40) ने इस साल अब तक 20% और 14.3% की बढ़त दर्ज की है, जिससे यह साबित होता है कि यूरोपीय बाजारों में अब भी मजबूती बनी हुई है।
इसके विपरीत, S&P 500 Index इस साल की शुरुआत से अब तक 4% गिर चुका है, जबकि Nasdaq Composite में 8.4% की गिरावट आ चुकी है। यह दिखाता है कि अमेरिकी बाजार अभी भी उथल-पुथल से बाहर नहीं निकल पाया है और Investors की धारणा कमजोर बनी हुई है।
अगर एशियाई बाजारों की बात करें, तो हॉन्ग कॉन्ग का Hang Seng Index 18% की बढ़त के साथ इस साल के सबसे तेज रफ्तार वाले बाजारों में से एक रहा है। इसके विपरीत, भारत का Nifty 50 अब तक 2% गिर चुका है, जिससे भारतीय बाजार की कमजोरी भी साफ नजर आ रही है।
आने वाले समय में क्या होगा?
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि अमेरिकी बाजार कब तक स्थिर होगा। Trade Policies को लेकर जारी असमंजस, Big Tech Stocks की गिरावट और Global Economic Conditions को देखते हुए Investors अब काफी सतर्क हो गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यदि अमेरिका की Trade Policies में बदलाव नहीं हुआ और Tariffs का दबाव बना रहा, तो अमेरिकी बाजार की स्थिति और भी खराब हो सकती है। कई Analysts यह भी मानते हैं कि अगर Big Tech Stocks में Recovery नहीं आती, तो S&P 500 और Nasdaq में और गिरावट देखने को मिलेगी।
दूसरी तरफ, यूरोप और एशिया के कुछ बाजार मजबूत बने हुए हैं, जो यह संकेत देता है कि Global Equity Market में एक नया Balance बन सकता है।
अमेरिकी शेयर बाजार में भारी गिरावट ने उसकी Global Equity Market में पकड़ कमजोर कर दी है। खासतौर पर Tech Stocks की गिरावट ने S&P 500 को झटका दिया और Global Investors को चिंता में डाल दिया है। आने वाले हफ्तों में Market का रुख Trade Policies और Tariffs से प्रभावित होगा, जिससे Equity Markets में और उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
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