Share Market: अमेरिकी टैरिफ के बावजूद बढ़त के साथ बंद हुआ बाजार, रुपये में हलचल

Share Market: भारतीय शेयर बाजार ने आज शानदार प्रदर्शन किया और अमेरिकी टैरिफ को लेकर बनी टेंशन के बावजूद हरे निशान पर बंद हुआ। यह वित्त वर्ष 2025-26 का पहला ट्रेड सेशन था, जहां बाजार की शुरुआत पॉजिटिव रही और दिन के अंत में भी मजबूती के साथ बंद हुआ। दूसरी तरफ, डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे मुद्रा बाजार में अस्थिरता बनी रही।

Share Market में जबरदस्त उछाल

आज के क्लोजिंग सेशन में भारतीय शेयर बाजार ने जबरदस्त उछाल देखा। बीएसई सेंसेक्स 592.93 अंकों की बढ़त के साथ 76,617.44 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 166.65 अंकों की मजबूती के साथ 23,332.35 पर पहुंच गया। यह बढ़त घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के आधार पर देखने को मिली।

बाजार में तेजी के पीछे कई अहम कारण रहे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी, जबकि ग्लोबल संकेत भी सकारात्मक बने रहे। अमेरिकी बाजारों में मजबूती के चलते भारतीय निवेशकों का कॉन्फिडेंस बढ़ा, जिससे बाजार को सहारा मिला। इसके अलावा, घरेलू आर्थिक आंकड़े भी मजबूत रहे। खासकर, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी रिपोर्ट्स ने बाजार को सपोर्ट दिया।

कच्चे तेल की कीमतों में हालिया स्थिरता ने भी निवेशकों को राहत दी। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में पिछले कुछ हफ्तों से ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिला, जिससे भारतीय बाजार को कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।

डॉलर के मुकाबले रुपये में हलचल

अमेरिकी टैरिफ नीति को लेकर बनी अनिश्चितता और विदेशी पूंजी निकासी के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। इंटरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 85.65 प्रति डॉलर पर खुला था और दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद 85.52 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

रुपये की गिरावट के पीछे कुछ अहम वजहें रहीं। अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी लागू होने के बाद से वैश्विक व्यापार पर असर देखने को मिल रहा है, जिससे रुपये पर दबाव बना। विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण रही। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से शुद्ध रूप से 5,901.63 करोड़ रुपये के शेयर निकाले, जिससे मुद्रा पर असर पड़ा।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया। हालांकि, घरेलू बाजार की मजबूती और डॉलर में कमजोरी ने इस गिरावट को सीमित किया। डॉलर इंडेक्स 0.12 प्रतिशत गिरकर 104.13 पर बंद हुआ, जिससे भारतीय रुपये को हल्का सपोर्ट मिला।

एफआईआई और डीआईआई का निवेश ट्रेंड

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली के बावजूद, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार में मजबूत पकड़ बनाए रखी। भारतीय निवेशकों की खरीदारी के चलते बाजार को मजबूती मिली और सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान पर बंद हुए।

मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी का कहना है कि व्यापार शुल्क को लेकर बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच रुपया दबाव में रह सकता है। हालांकि, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और मजबूत घरेलू बाजार की वजह से रुपये को निचले स्तर पर समर्थन मिलने की संभावना है।

ब्रेंट क्रूड और डॉलर इंडेक्स का असर

तेल की कीमतों में उछाल ने रुपये पर दबाव बढ़ाया, लेकिन बाजार को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। ब्रेंट क्रूड 0.12 प्रतिशत गिरकर 74.40 डॉलर प्रति बैरल पर रहा, जबकि डॉलर इंडेक्स 0.12 प्रतिशत की गिरावट के साथ 104.13 पर बंद हुआ। डॉलर इंडेक्स की कमजोरी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी को हल्का समर्थन मिला।

आगे क्या रहेगा बाजार का ट्रेंड?

शेयर बाजार की मौजूदा तेजी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन आगे भी कई फैक्टर्स को ध्यान में रखना होगा। अमेरिकी टैरिफ नीति का असर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अगर अमेरिकी सरकार आगे भी नए टैरिफ लागू करती है, तो इसका असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति भी बाजार के ट्रेंड को प्रभावित कर सकती है। अगर फेड ब्याज दरों में कोई बड़ा बदलाव करता है, तो भारतीय बाजार में अस्थिरता आ सकती है।

एफपीआई का मूड भी बाजार की दिशा तय करेगा। अगर विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी रहती है, तो बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, भारतीय कंपनियों के Q1 2025-26 के नतीजे भी मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं।

भारतीय शेयर बाजार ने अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी के बावजूद शानदार प्रदर्शन किया और बढ़त के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में मजबूती देखने को मिली, जबकि रुपये में हल्की गिरावट आई। निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और एफपीआई के मूवमेंट पर नजर रखनी होगी। अगर बाजार में स्थिरता बनी रहती है, तो आने वाले हफ्तों में सेंसेक्स-निफ्टी नए रिकॉर्ड बना सकते हैं।

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