Uniform Civil Code: जिसे हिंदी में समान नागरिक संहिता कहा जाता है, भारत के संवैधानिक, सामाजिक और कानूनी ढांचे का एक बहुचर्चित मुद्दा है। यह विषय समय-समय पर चर्चा में आता रहा है, लेकिन क्या वास्तव में हम इसको समझते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं कि Uniform Civil Code क्या है, इसकी जरूरत क्यों महसूस की जा रही है, और इसके पक्ष-विपक्ष में क्या तर्क दिए जाते हैं।
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Uniform Civil Code (UCC) क्या है?
Uniform Civil Code (UCC) का अर्थ है – ऐसा एक समान नागरिक कानून, जो देश के सभी नागरिकों पर धर्म, जाति या समुदाय से परे एक समान रूप से लागू हो। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि विवाह, तलाक, गोद लेना, उत्तराधिकार और संपत्ति बंटवारे जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम हों।
वर्तमान में भारत में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं:
- हिंदू समुदाय के लिए: Hindu Marriage Act, Hindu Succession Act आदि
- मुस्लिम समुदाय के लिए: Muslim Personal Law (Shariat) Application Act
- ईसाई और पारसी समुदायों के लिए भी अलग-अलग कानून हैं
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Uniform Civil Code का उद्देश्य इन सभी धार्मिक कानूनों को हटाकर एक समान नागरिक संहिता लागू करना है जो सभी भारतीय नागरिकों पर लागू हो।
संविधान में UCC का स्थान
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 (Directive Principles of State Policy) कहता है:
“राज्य भारत के समस्त भूभाग में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुरक्षित करने का प्रयास करेगा।”
हालाँकि यह संविधान का एक निर्देशक सिद्धांत है, इसलिए इसे लागू करना सरकार की नैतिक जिम्मेदारी तो है, लेकिन यह कानून की तरह बाध्यकारी नहीं है।
क्यों जरूरी है Uniform Civil Code?
1. समानता और न्याय
UCC सभी नागरिकों को एक जैसा कानून प्रदान करता है, जिससे लैंगिक समानता और समान नागरिक अधिकार सुनिश्चित होते हैं।
2. धर्मनिरपेक्षता की सच्ची परिभाषा
जब सभी धर्मों के नागरिकों के लिए समान कानून होंगे, तभी भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान और मजबूत होगी।
3. महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा
वर्तमान में कई धार्मिक कानून महिलाओं के साथ भेदभाव करते हैं। Uniform Civil Code उनके अधिकारों की सुरक्षा करेगा।
4. राष्ट्रीय एकता और अखंडता
एक कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा तो लोगों में नागरिकता की समान भावना उत्पन्न होगी, जिससे राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा।
Uniform Civil Code के पक्ष में तर्क
- संविधान में समानता का समर्थन
- तुष्टिकरण की राजनीति पर रोक
- न्यायिक प्रणाली पर दबाव में कमी
- महिलाओं और कमजोर वर्गों को न्याय
Uniform Civil Code के खिलाफ तर्क
- धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का आरोप
- भारत की सांस्कृतिक विविधता को नज़रअंदाज़ करना
- अल्पसंख्यकों में असुरक्षा की भावना
- राजनीतिकरण और गलत व्याख्याएं
हाल की गतिविधियाँ और राज्यों की भूमिका
हाल के वर्षों में कुछ राज्यों ने इस दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड सरकार ने 2024 में एक ड्राफ्ट Uniform Civil Code बिल पेश किया। इसने संकेत दिया कि अब यह विषय सिर्फ बहस का हिस्सा नहीं रहेगा, बल्कि ज़मीनी हकीकत बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने कई निर्णयों में UCC की आवश्यकता को रेखांकित किया है, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों और समानता के संदर्भ में।
Uniform Civil Code लागू करने की चुनौतियाँ
- सामाजिक सहमति की आवश्यकता
- धार्मिक समूहों से संवाद
- कानूनी ढांचे में समायोजन
- चरणबद्ध कार्यान्वयन की रणनीति
Uniform Civil Code भारत के लोकतंत्र में एक ऐसा सुधार हो सकता है जो समानता, न्याय और एकता को मजबूती प्रदान करे। यह सिर्फ एक कानूनी बदलाव नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की दिशा में एक साहसिक कदम होगा।
अगर सरकार और समाज मिलकर संवेदनशीलता और समावेशिता के साथ इसे लागू करें, तो यह भारत को एक आधुनिक और समान नागरिकता वाला राष्ट्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल होगी।
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