Trump Putin meeting: 16 अगस्त 2025 को अलास्का के एंकोरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन हुआ। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य रूस और यूक्रेन के बीच पिछले तीन साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाना था। यह बैठक वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है, क्योंकि इसका परिणाम न केवल यूक्रेन और रूस, बल्कि यूरोप की सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता पर भी प्रभाव डाल सकता है। इस लेख में हम इस बैठक के महत्व, चर्चा के प्रमुख बिंदुओं, और इसके संभावित परिणामों पर विस्तार से बात करेंगे।
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अलास्का ही क्यों और इसका महत्त्व
अलास्का का चयन इस शिखर सम्मेलन के लिए प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण था। 1867 तक अलास्का रूस का हिस्सा था, जब इसे अमेरिका ने खरीद लिया था। यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से रूस के करीब है, क्योंकि दोनों देशों को केवल बेरिंग जलडमरूमध्य अलग करता है। इस मुलाकात के लिए अलास्का के एलमेंडोर्फ-रिचर्डसन सैन्य अड्डे को चुना गया, जो अमेरिका की सैन्य तैयारियों का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह स्थान रूस और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक और भौगोलिक संबंधों को दर्शाता है, जिसे पुतिन ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में “पड़ोसी” के रूप में संबोधित किया।
इसके अलावा, यह पहली बार था जब एक रूसी राष्ट्रपति अमेरिकी सैन्य अड्डे पर पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, और एंकोरेज शहर में होटलों से लेकर हवाई मार्ग तक में बदलाव किए गए। इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर थी, क्योंकि यह यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता था।

बैठक का उद्देश्य और प्रमुख चर्चाएँ
रूस-यूक्रेन युद्ध, जो 1269 दिनों से चल रहा है, इस बैठक का केंद्र बिंदु था। ट्रंप और पुतिन ने लगभग ढाई घंटे तक चली Trump Putin meeting में युद्ध को समाप्त करने की संभावनाओं पर गहन चर्चा की। हालांकि, इस मुलाकात में सीजफायर या किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बनी, लेकिन दोनों नेताओं ने इसे सकारात्मक और रचनात्मक बताया।
ट्रंप का दृष्टिकोण
Trump Putin meeting में डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक को “अनुभव-आधारित मुलाकात” करार दिया, जिसका लक्ष्य पुतिन को बातचीत की मेज पर लाना था, न कि तुरंत शांति समझौता करना। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन कुछ बड़े मुद्दे अभी भी बाकी हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि वे जल्द ही यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और नाटो नेताओं से बात करेंगे ताकि इस चर्चा को आगे बढ़ाया जा सके।
ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि पुतिन युद्ध समाप्त करने पर सहमत नहीं होते, तो रूस को गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने पुतिन को “स्मार्ट व्यक्ति” बताते हुए उनके साथ रचनात्मक बातचीत की सराहना की। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी रणनीति यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ रूस की चिंताओं को भी संबोधित करने की है।
पुतिन का दृष्टिकोण
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बैठक को “रचनात्मक और परस्पर सम्मान” का माहौल बताया। उन्होंने कहा कि वे युद्ध को समाप्त करने के लिए “ईमानदारी से इच्छुक” हैं, लेकिन इसके लिए संघर्ष के मूल कारणों को सुलझाना होगा। पुतिन ने दावा किया कि यदि 2022 में ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति होते, तो यह युद्ध शुरू ही नहीं होता। उन्होंने अमेरिका और रूस को “करीबी पड़ोसी” बताते हुए आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
पुतिन ने यह भी कहा कि यूक्रेन की स्थिति रूस की सुरक्षा के लिए एक बुनियादी खतरा है, लेकिन वे यूक्रेन की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों और कीव से अपेक्षा जताई कि वे इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाएंगे और किसी भी तरह की गुप्त साजिश से बचेंगे। पुतिन ने ट्रंप को मॉस्को में अगली मुलाकात के लिए न्योता भी दिया, जिस पर ट्रंप ने कहा कि यह “संभव” हो सकता है।
यूक्रेन की अनुपस्थिति पर जेलेंस्की की प्रतिक्रिया
Trump Putin meeting में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की शामिल नहीं थे, जिसके कारण उन्होंने निराशा व्यक्त की। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन के बिना यूक्रेन के भविष्य का फैसला नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि डोनबास क्षेत्र को छोड़ना रूस के लिए तीसरा युद्ध शुरू करने का आधार बन सकता है। जेलेंस्की ने अमेरिकी समर्थन पर भरोसा जताया, लेकिन रूस की मंशा पर संदेह व्यक्त किया।
वैश्विक और क्षेत्रीय प्रभाव
Trump Putin meeting का प्रभाव केवल रूस और यूक्रेन तक सीमित नहीं है। यूरोपीय देश, विशेष रूप से फ्रांस, जर्मनी, और यूके, इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी दी जाए। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो ने मांग की कि यूक्रेन को इस तरह की वार्ताओं में शामिल किया जाए। दूसरी ओर, अमेरिका भारत जैसे देशों पर रूस के साथ व्यापारिक संबंधों को सीमित करने का दबाव डाल रहा है, क्योंकि उनका मानना है कि यह रूस को युद्ध के दौरान आर्थिक मजबूती प्रदान करता है।
भविष्य की संभावनाएँ
हालांकि इस बैठक में कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, लेकिन दोनों नेताओं ने भविष्य में और वार्ताओं की संभावना जताई। पुतिन ने इसे “समझौते की शुरुआत” कहा, जबकि ट्रंप ने इसे एक “सकारात्मक कदम” बताया। यह मुलाकात शांति की दिशा में एक नींव रख सकती है, बशर्ते यूक्रेन और अन्य हितधारक इसमें रचनात्मक भूमिका निभाएँ।
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पुतिन ने यह भी संकेत दिया कि रूस डोनबास पर नियंत्रण और यूक्रेन के नाटो में शामिल न होने की शर्त रख सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप ने यूक्रेन को सैन्य सहायता रोकने की बात कही है, जो यूरोपीय देशों के लिए चिंता का विषय है।
निष्कर्ष
अलास्का में Trump Putin meeting ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक नई उम्मीद जगाई है, लेकिन यह रास्ता अभी भी जटिल है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की तारीफ की और बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन ठोस परिणामों की कमी ने कई सवाल खड़े किए हैं। यह बैठक वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है, लेकिन इसका असली प्रभाव तभी दिखेगा जब यूक्रेन, नाटो, और अन्य हितधारकों के साथ आगे की वार्ताएँ होंगी। इस बीच, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह मुलाकात यूक्रेन में शांति ला पाएगी, या यह केवल कूटनीतिक चर्चाओं का एक और दौर साबित होगी।